राजनीति में पारदर्शिता और लोकतंत्र की मजबूती के लिए कर्नाटक से आकर अमेठी और बनारस से चुनाव लड़ रहे है डा यू.पी. शिवानंद

अमेठी

अमेठी लोकसभा सीट पर पूरे देश की निगाहे है इस सीट पर दो राष्ट्रीय पार्टी के उम्मीदवार के साथ कई क्षेत्रीय दल और निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में है उन्ही उम्मीदवारों में से अमेठी के सभी उम्मीदवारों में सबसे शिक्षित कर्नाटक प्रदेश के डॉक्टर यूपी शिवानंद में कर्नाटक के पुत्तुर के रहने वाले डॉक्टर यू.पी. शिवानंद की शैक्षिक योग्यता एमबीबीएस है वह एक दैनिक व सप्ताहिक समाचार पत्र के संपादक भी  हैं डॉक्टर शिवानंद अमेठी के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से भी चुनाव लड़ रहे है अमेठी में वह अपनी साइक्लोजिस्ट पुत्री के साथ चुनाव प्रचार कर रहे हैं वह राजनीति में पारदर्शिता और लोकतंत्र की मजबूती को लेकर मैदान में हैं | रायबरेली न्यूज़ से बात करते हुये डा यू .पी. शिवानंद ने कहा की  –   मैं यू .पी. शिवानंद कर्नाटका से आया हूं मैं प्रोफेशन से डॉक्टर हूं लेकिन पिछले 35 सालों से समाचार पत्र का संपादक और प्रशासक हूं| महात्मा गांधी ने आजादी के बाद जिस ग्राम स्वराज की कल्पना की थी आजादी के सत्तर  साल बाद भी वह गांव गरीब और कमजोर से  बहुत दूर चली जा रही है | आजादी के बाद हमारे स्वतंत्रता सेनानी और संविधान कि जो भावना थी | वह देश के हर नागरिक गरीब और कमजोर के लिए समान अवसर समान अधिकार की थी महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की जो कल्पना थी वह देश की सबसे छोटी इकाई ग्राम पंचायत न्याय पंचायत क्षेत्र पंचायत जिला पंचायत विधान सभा विधान परिषद लोकसभा और राज्यसभा को समान आर्थिक, और प्रशासनिक अधिकार दिए जाने के हैं लेकिन आज हम उसकी उल्टी दिशा में चल दिए हैं |लोक तंत्र को राजतंत्र बनाने की पूरी कोशिश हमारी राजनीतिक पार्टियां कर रही हैं आज हमारे वोट के अधिकार को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है संविधान ने  हमें वोट का जो अधिकार दिया है हमारा वोट उतना ही ताकतवर है जितना राष्ट्रपति प्रधानमंत्री या किसी बड़े उद्योगपति का हमें अपने वोट की  ताकत को पहचानना होगा। हमारा वोट लेने के बाद हमारा जनप्रतिनिधि अपनी पार्टी और नेताओं के इशारे पर काम करता है हम अपने प्रतिनिधि से सवाल नहीं पूछ सकते हमारे मत से चुना गया प्रतिनिधि हमारी समस्याओं को सुने और उसका समाधान करें, हमें यह अधिकार चाहिए कि काम ना करने वाले जनप्रतिनिधि को हम वापस बुला सकें।

स्वतंत्रता आंदोलन की जो भावना थी की आजादी के बाद हर गरीब और कमजोर को समानता और बराबरी का अधिकार मिलेगा वह अभी बाकी ही नहीं है हमें राजनैतिक पार्टियों के  द्वारा  उसे उल्टी दिशा में ले जाया जा रहा है 1947 में आजादी  मिलने के बाद आज भी ब्रिटिश काल की व्यवस्थाएं हम पर लागू है हमारे लोक सेवक कर्मचारी अधिकारी और जनता के प्रतिनिधि उसी तरह काम कर रहे हैं जैसे अंग्रेज किया करते थे अंत में हमारे द्वारा चुना गया प्रतिनिधि चुने जाने के बाद अपने आप को राजा समझने लगता है हम अपने प्रतिनिधि से सवाल नहीं पूछ सकते उससे मिल नहीं सकते वह अपनी  पार्टीयों के और नेताओं के नियंत्रण का गुलाम होता है ।

भारतीय नागरिकों का दमन करने के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा 1860 में बना पुलिस रेगुलेशन एक्ट आज आजादी के 72 साल बाद भी हमारे  नागरिक अधिकारों का दमन कर रहा है हमारे लिए बनाए गये  कानून सरकार और व्यवस्था के बंधक है इस विषय पर कोई राजनेता या राजनैतिक दल  बात सुनने और करने को तैयार नहीं है।

हमारे सरकारी कार्यालय और न्यायालय ब्रिटिश कालीन परंपरा के पोषक हैं हम नागरिक वहां याचना की दीन हीन दशा में हम वर्षों समाधान और न्याय के लिए ठोकरें खाते हैं।

हमारे चुने गए जनप्रतिनिधि जनता के प्रति जवाबदेह ना होकर उनकी समस्याओं को ना सुनकर ट्रांसफर और पोस्टिंग का कारोबार चला रहे हैं ग्राम विकास अधिकारी  पुलिस जनता से वसूली करके अपने उच्च  अधिकारियों और उच्च  अधिकारी से होते हुए प्रदेश स्तर तक  रकम पहुंचाते हैं ऐसा ही ब्रिटिश काल में होता था।

आज देश में राहुल गांधी बनाम मोदी के नाम पर वोट मांगा जा रहा है जिसमें जनता के सवाल और जनता के उम्मीदवार गायब है लोकतंत्र को राजशाही में बदलने का यह खेल ग्रामस्वराज और आजादी की भावना के विपरीत है हमें इससे  सावधान होने की जरूरत है।

हमने इस लिए सारे देश को संदेश देने के लिए कांग्रेस और भाजपा के बड़े नेताओं के चुनाव क्षेत्रों को चुना है और अपना नामांकन किया है

ऋषि कुमार

रायबरेली न्यूज़

 

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