तिरगें को नमन

झूमे धरती झूमे अंबर झूमता है दिग – दिगंत

 भूली बिसरी यादें लेके आया है 15 अगस्त

करू तिरंगे को नमन सर झुका कर आंख नम

ऐ शहीदों आप को शत-शत प्रणाम देश का रोशन किया दुनिया में नाम

मुल्क का हर नागरिक ए मोहतरम आप की अजमत को करता है सलाम

आप में कितना था साहस  आपने कितना था दम

जब गुलामी से हुई नफरत तो देखो रख दिया तथा पलटकर आपने

 खून की खेली है  होली सुबहो शाम टिक नहीं पाएं थे  दुश्मन सामने

फांसी के तख्ते पर झूले कहके वंदे मातरम

देश की आजादी का सपना संजोए सिर्फ मंजिल की रहे डग नापते

 देशभक्ति का लिए जज्बा चले फर्क ना समझे हैं वो दिन रात में

टूटने पाया नहीं हरगिज कभी मां का भरम

 हम को देखकर आप आजादी चले पर नहीं निकले हैं कुछ इंसान भले

भूल बैठे आप की कुर्बानी को क्या  कहें   हम  लोगों   की  नादानी को

 भूल बैठे फर्ज को और अपना वह धरम

 क्या बताएं क्या है हालत देश की नफरतों कि बिछ रही है गोटियाँ

 इस कदर कानून की  उडी धज्जियां ना सलामत अब रही घर बेटियां

 हर तरफ भ्रष्टाचार का धंधा गरम

गर बचाना है हमें अपना वतन टूटने पाए ना हो इसका पतन ये दोस्तों

 करना होगा मिलकर सबको  जतन महके  फिर से यह प्यारा   चमन

भेदभाव छोड़ कर सफ़ीर रक्खो  आगे कदम

                                                                                                                                                           रमजान अली सफ़ीर

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